Betul Jal Jivan Mission: जलजीवन मिशन में घटिया काम देखना है तो चांदबेहड़ा आ जाईए, प्रभारी मंत्री कुछ भी बोलें पर काम दो कौड़ी का ही होगा

Betul Jal Jivan Mission: जल जीवन मिशन अंतर्गत होने वाले घटिया काम को लेकर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार अभी हाल में ही जिला योजना समिति की बैठक में नाराजगी जाहिर करके गए है। भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं से उन्हें जो फीडबैक मिला, उसके आधार पर उन्होंने अधिकारियों की खुलकर खिंचाई की थी। जलजीवन मिशन में हर स्तर पर घटिया काम हो रहा है। पाइप लाइन बिछाने से लेकर विद्युतीकरण तक के काम में खुली धांधली की जा रही है। अधिकारियों द्वारा अमानक स्तर की सामग्रियों का उपयोग होने पर भी अपनी आंख बंद रखी जा रही है। इसका जीता जागता उदाहरण चांदबेहड़ा पंचायत है। यहां पर जलजीवन मिशन योजना में जिस बोर से पेयजल की सप्लाई होना है, उसके पास किया गया विद्युतीकरण का काम निम्न दर्जे का बताया जा रहा है।

पुराने पोल और 11 केवी लाइन का उपयोग

जो एक्सपर्ट है, उनका कहना है कि चांदबेहड़ा में ठेकेदारा द्वारा पुराने पीसीसी पोल का उपयोग किया गया है और वहीं टेपिंग डीपी के स्थान पर पुरानी 11 केवी लाइन का उपयोग किया गया है। जबकि प्राक्कलन में दो पोल उपयोग किया जाना था।

कंडक्टर, इंसुलेटर, वी-क्रास मानक स्तर के ही नहीं

एक्सपर्ट के अनुसार 11 केवी लाइन उपयोग किए गए कंडक्टर, वी क्रास, इंसुलेटर मानक स्तर के नहीं है। वहीं लगाया गया 25 केवी का ट्रांसफार्मर एप्रूव्ड वेंडर का नहीं है। जो कि निम्न स्तर का है। डीपी पर लगाए गए स्टेपर इंसुलेटर नहीं है।

एल-ए सर्किट भी मात्र दिखावे के लिए लगाया

चांदबेहड़ा में जो विद्युतीकरण का काम हुआ है, उसको देखने के बाद जानकार ने बताया कि डीपी में जो स्टे तार लगाया है, वह भी अमानक स्तर का है। एल ए मात्र दिखावे के लिए मात्र लगा दिए गए है। ट्रांसफार्मर बॉक्स निम्न स्तर लगा दिया है।

डीपी में मीटर लगाना भी जरूरी नहीं समझा

चांदबेहड़ा में के विद्युतीकरण काम में धांधली का नमूना यह है कि डीपी पर मीटर लगाना अनिवार्य है, लेकिन सीधे केबल जोड़कर कनेक्शन चालू कर दिया गया हैं। ट्रांसफार्मर में चैनल का प्रावधान था, वह भी लगाना जरूरी नहीं समझा गया।

घटिया मटेरियल का उपयोग करने में भी कोई रोक नहीं

चिचोली विद्युत वितरण केन्द्र के अंतर्गत चांदबेहड़ा में हो रहे इस विद्युतीकरण काम में निम्न स्तर और घटिया स्तर के मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है। हालात यह है कि अधिकारी आंख बंद करके ऐसे बैठे हैं कि प्राक्कलन में एलटी लाइन का प्रावधान होने पर भी डाली नहीं गई और कोई बोल नहीं रहा।

3.35 लाख के विद्युतीकरण में प्राक्कलन के अनुसार काम नहीं

यदि कायदे से देखा जाए तो केन्द्र सरकार की इस स्कीम में खुली धांधली हो रही है, जिसका नमूना चांदबेहड़ा में हुआ विद्युतीकरण का काम है। यहां पर 3 लाख 35 हजार के काम में प्राक्कलन के अनुसार कोई काम नहीं किया गया। अधिकारी और ठेकेदार मिलकर पलीता लगा रहे हैं।

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